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तहें..

उस सरल रेखा में कितनी तहें थी करीब से देखा तो जाना जिल्द पर मर्यादा का कवर चढ़ाए उसने औरों को आगे रक्खा बाबूजी के सपने माँ की शिक्षाएं भाई बहनों की बिना पर उसने स्वयं को कवर के नीचे … Continue reading

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वापसी- एक लघु कथा

गांव की सरस्वती नदी के किनारे वाले वट वृक्ष के नीचे मैं अपना खाली समय गुजारा करता था। अपनी बाँसुरी पर रियाज़ करना, या कोई धुन गाना मुझे अतिप्रिय था। वय 15-16 की जो जिसमें रम जाए वैसी हो जाये! … Continue reading

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रात बाहों में….

अधरों पर मुस्कान बिखेरे अंकपाश में थे तुम मेरे मंद रोशनी थी कमरे में महक उठे बिस्तर तकिए उस रात के पल थे सुनहरे रात बाहों में थे तुम मेरे जिस्म दहक रहा था मेरा टूट रहा था लाज का … Continue reading

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एक औरत ने मुझे

एक औरत ने मुझे जन्म देकर जीने का मौका दिया स्नेह अमृत बरसाया मुझ पर वो मां थी….मेरा खुदा ! एक औरत ने मुझे उंगली थामकर चलना सिखलाया जब मां और कहीं थी तब माँ वही थी सबसे बचाती थी … Continue reading

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नारी

मनुस्मृति कहती है.. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः यत्रेतास्तु न पूज्यन्ते सरवास्तत्राफला: क्रियाः जहाँ स्त्रियां पूजी जाती हैं वो फिजा देवमयी हो जाती है जो न करते सम्मान उनका हर चाहत उनकी धूमिल हो जाती है तेरे बगैर कल … Continue reading

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नदारद..

जीवन बन बैठा मशीन है करुणा ममता भाव नदारद तेल मसाले सब पैकेट में मोल लगाते भाव नदारद कूलर ऐ सी घर घर आ गए नीम आम की छांव नदारद सब कुछ मिल जाता टी वी पर हाट मेलों का … Continue reading

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बेटी

जब घर के आंगन में खुदाई नेमत बोती है भाग खुलते है परिजनों के उस घर मे बेटी होती है ममता माया और करुणा पलकों के कोर भिगोती है प्रतिरूप जन्मता है उनका उस घर में बेटी होती है यूँ … Continue reading

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“ज़रा ये भी देखते जाओ..”

‘उसको देखते जाओ’, ‘इसकी सुनते जाओ’.. अरे..!! गृहस्थ क्या बसाया पग पग पर आदेशों का साया नौकरी करें या फिर मैडम ही को सुनें इन्हें क्या पता कितने पापड़ पड़ते हैं बेलने घर आये नहीं के मैडम जी लगती हैं … Continue reading

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ऐ दोस्त !

ऐ दोस्त ! साथी बहुत पाए मैंने पैसे भी बहुत कमाए मैंने रिश्तों में मगर गरीबी रही तुझ जैसी बात न बन पाई कहाँ गए वो दिन भाई कांधों से हाथ हटता नहीं था खाना न होता कभी हमारा पराठा … Continue reading

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हमसे न हो सका

ज़माने भर का दिखावा हमसे न हो सका ओढ़ कर बनावट जी रही है दुनियाँ दर्द को छुपाकर बेवजह मुस्कुराना हमसे न हो सका जो बात थी दिल में बेलाग बोल दी ना को हाँ बनाना हमसे न हो सका … Continue reading

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