Category Archives: Uncategorized

एक संस्मरण- गांव में फूल चुनने की रस्म:-

कुछ दिन पूर्व अपने रिश्तेदार के “फूल चुनने” की रस्म पर एक गाँव मे जाना पड़ा।समयानुसार सब कार्यक्रम हुआ और पास की एक नदी में स्नान करके सब लौट गए , मैं भी गृह नगर आ गया ग्रामीण जीवन की … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

टिमटिमाता दीया

कभी मुखर हुएकभी होंठों को सिया हैजिंदगी क्या हैटिमटिमाता दीया है कभी थोड़े मेंकभी चौड़े मेंखुद की समायोजित किया हैजिंदगी भी क्या हैइक़ टिमटिमाता दीया है खशियों संग रास रचाई हैकभी गम का हलाहल पिया हैजिंदगी.. इक़ टिमटिमाता दीया है … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

मन-

मनता नहीं थमता नहीमन चंचल है समझता नहींसब से जीते और मन से हारेबहुत चाहा मन सधता नहीं मन की गति प्रकाश से ज्यादामन राजा और जीवन प्यादा मन के मारे हार है पाईमन नहीं समझत है भाई मन को … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

मेरी कविता- “चंद्र”

नित्य गगन की करो सवारीचन्द्र तुम्हारी बात है न्यारी नया रोज रूप तुम धरतेप्रेम उपासक तुम पर मरतेहै मामा बतलाती महतारीचंद्र तुम्हारी बात है न्यारी लाख सितारे रंग हैं भरतेसारे जगत को जगमग करतेरैन की तुम बिन सूनी अटारीचंद्र तुम्हारी … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

अमरूदों की खेती

गाँव में छोटा सा घर था हमारा। यूँ तो 40 बीघा जमीन हुआ करती थी मगर पीढ़ियों के बँटवारे होते होते अब हमारे हिस्से में 10 बीघा का खेत बचा था। पिताजी ने हल चलाकर मेहनत करके उसी से घर … Continue reading

Posted in Uncategorized | 2 Comments

बीस साल आगे

कल्पनाओं पर आधारित एक उपन्यास को पढ़ते पढ़ते जाने कब आँख लग गई लेकिन रोचक तो जब लगा कि सुबह उठा तो कल्पना हकीकत बन गई थी। घुटनों में यकायक उठे दर्द के साथ सिंक तक गया और शीशा देखा … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

हमारी जुदाई शक्ति

कल रात एक अद्भुत अहसास हुआ । जिसे हम स्वप्न कहते हैं उसे मैं जाग्रत अवस्था मे देख रहा था।भगवन प्रकट हुए और बोले तुम दुख में सबके काम आते हो । हृदय से सरल हो। मै तुमसे प्रसन्न हूँ … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

हालात

उसे बेतरतीब बदहवास और बिखरे हुए कपड़ों में एक अधेड़ सज्जन को काँधे पर थामे किसी गाड़ी की सहायता मांगते देखा तो समझ गया वो उसका करीबी था और स्थिति काफी संवेदनशील थी।“भैया हाथ जोड़ती हूँ मना मत करना किसी … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

ऐ हिंदी तुझमें माँ जैसा भाव है

ये कैसा लगाव हैऐ हिंदी तुझमें माँ जैसा भाव है उँगलियाँ थाम कर माँ नेतुझ संग चलना सिखलायाअ से अनार इ से इमली काहर रस तुझमें पायालिखना पढ़ना अंग्रेजी में भीबहुधा हुआ करता हैजाने क्यों मगर हिंदी से चाव हैऐ … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

वह तोड़ती पत्थर

( निराला जी की प्रसिद्ध कविता “वह तोड़ती पत्थर” की पंक्ति पर आधारित मेरी रचना) —————————— वह तोड़ती पत्थर रवि रश्मियों को कर उपेक्षित कर्म रत होकर मगन सन्तति है ध्येय उसका बढ़ रही है वो निरंतर वह तोड़ती पत्थर … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment