बीस साल आगे

  

कल्पनाओं पर आधारित एक उपन्यास को पढ़ते पढ़ते जाने कब आँख लग गई लेकिन रोचक तो जब लगा कि सुबह उठा तो कल्पना हकीकत बन गई थी।

घुटनों में यकायक उठे दर्द के साथ सिंक तक गया और शीशा देखा तो सर के ज्यादा तर बाल सफेद हो गए थे । आँखें मली तो जाग्रत अवस्था मे पाया।
तभी शीशे में पीछे नजर आया , मिसेज भी कुछ झुकी झुकी सी लड़खड़ाती मेरी ओर ही आ रही थी।
क्या बनाना है आज? और सुनो प्लीज अब कामवाली बाई लगवा लो जीवन भर तो खूब काम किया मगर अब नही होता..”
उसे मेरे सफेद बालों को देखकर बिल्कुल भी हैरत नही हुई…मेरे विस्मय पर उल्टे बोली, तुम भी न ऐसे व्यवहार कर रहे हो जैसे बीस साल छोटे हो गए हो!
मैंने कहा तुम्हारी चाल को क्या हुआ?
वो बोलीं क्या हुआ जैसा रोज होता है वही हुआ!
इतने में बेटा ड्राइंग रूम में आया उसे देखा तो उसे भी अधेड़ जैसा पाया..
आते ही बोला,
पापा हमारी सोसाइटी में कल से प्राणायाम का शिविर लग रहा है आप भी जाना…
सेहत के लिए अच्छा है। मैं भी समय एडजस्ट करके अपना प्रोग्राम बनाता हूँ। सुबह 6 बजे से है। मै बोला इतना जल्दी!
तो उसने तपाक से जवाब दिया जैसे पहले से ही इसके लिए तैयार हो, ” रोज 4 बजे उठकर घर भर में खटर पटर करते रहते हो और 6 बजे जल्दी लग रहा है?” मैं बुरी तरह विस्मृत था , ये हो क्या रहा है
तभी देखा दूध वाला भी बदल गया है और दूध बॉटल में लाया है । मैंने कहा अरे आज वो लीटर का पैमाना और दूध का चरा कहाँ है और साइकिल की जगह मोटरसाइकिल कब ले ली।
वो शायद जल्दी में था और मुस्कुराकर चला गया।
तब यकायक मैंने देखा, घर की सजावट बदल गई थी। मेज पर रखा टीवी दीवार पर टंग गया था। पर्दे साज सज्जा और फर्नीचर सब बदल गया था। और कोने में रखा टेलीफोन अब गायब था।
मुझे लगा दूसरों के घर मे तो नही आ गया!!
अखबार की सज्जा भी बदल गई थी । वो ब्लैक एंड वाइट अखबार रंगीन पत्रिका सा हो गया था
उसे उठाकर देखा, तो तारीख पर नजर गई। शायद सन गलत छप गया था । 2021 कि जगह 2041…!
तभी आंख खुल गई….मैं हड़बड़ा कर उठा और सीधे काँच के सामने गया तो देखा , सफेद बालों की मात्रा बहुत कम थी।
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About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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