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रात बाहों में….

अधरों पर मुस्कान बिखेरे अंकपाश में थे तुम मेरे मंद रोशनी थी कमरे में महक उठे बिस्तर तकिए उस रात के पल थे सुनहरे रात बाहों में थे तुम मेरे जिस्म दहक रहा था मेरा टूट रहा था लाज का … Continue reading

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