Monthly Archives: August 2019

“ज़रा ये भी देखते जाओ..”

‘उसको देखते जाओ’, ‘इसकी सुनते जाओ’.. अरे..!! गृहस्थ क्या बसाया पग पग पर आदेशों का साया नौकरी करें या फिर मैडम ही को सुनें इन्हें क्या पता कितने पापड़ पड़ते हैं बेलने घर आये नहीं के मैडम जी लगती हैं … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment

ऐ दोस्त !

ऐ दोस्त ! साथी बहुत पाए मैंने पैसे भी बहुत कमाए मैंने रिश्तों में मगर गरीबी रही तुझ जैसी बात न बन पाई कहाँ गए वो दिन भाई कांधों से हाथ हटता नहीं था खाना न होता कभी हमारा पराठा … Continue reading

Posted in Uncategorized | Leave a comment