Monthly Archives: January 2019

शहर में तेंदुआ

शहर के एक हिस्से में खास तौर से रात में गहन सन्नाटा बढ़ने लगा था। यह कोई ठिठुरती हुई रातों की वजह से नहीं , ना ही गुंडागर्दी, लूटपाट की वारदातें बढ़ गई थीं.. बल्कि एक तेंदुआ शहर में घुस … Continue reading

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अम्मा जी

जब तक मेरी शादी नहीं हुई थी, नौकरी के दौरान मुझे अपना किराए का कमरा कई दफा बदलना पड़ा। कुंआरों को घर में जगह देने से लोग बहुत सतर्क रहते हैं। अनजाने शहर में कहीं रहने की ठौर पा लेना, … Continue reading

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अक्ल

” तुम्हारी माँ ही आई थीं ये रिश्ता लेकर हमारे घर , बात बात पर तुम्हारी फोटो लेकर मेरे परिवार वालों को दिखाती ‘देखो जोड़ी खूब जमेगी आपके बेटे के संग’, अक्सर विवेक अपनी पत्नी सरिता का इस तरह प्रतिकार … Continue reading

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बाज़ार

अहा! कितने खूबसूरत दिन थे वो !! जब दादाजी की उंगली थाम कर मेले में जाया करता था मैं। मेरे लिए मेला इस बात का जश्न था कि झूलों का लुत्फ उठाने को मिल जाता और ,रबड़ी कुल्फी खाने का … Continue reading

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मिस्ड कॉल

सरिता को कई दिनों से एक मिस्ड कॉल परेशान कर रहा था। एक ही नंबर से मिस्ड कॉल आता। सरिता के पति शुभम का जॉब कुछ ऐसा था कि उन्हें अक्सर शहर से बाहर जाना होता। इस दौरान सरिता घर … Continue reading

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दो – दो सूरज (लघु कथा) ————————————-

मैं बस से सफर कर रहा था। सर्दी का मौसम था। गाड़ी में गहमागहमी थी मगर जाड़े की वजह से जी को सुकून था। पास की सीट पर एक सभ्रांत महिला यात्रा कर रही थी। गोद में एक मासूम करीब … Continue reading

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