Monthly Archives: December 2018

आनंदी

आनंदी का प्रलाप जारी था। रात के सन्नाटे में घर में अपनी मां के पास लेटी लालटेन की मध्दिम रोशनी में आनंदी का दर्द किसी बेलगाम झरने की तरह बह निकला था। असहाय सी उसकी मां के पास सांत्वना और … Continue reading

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मेरा खेल-बैडमिंटन ~

छुट्टी का दिन.. और अलसाई सुबह ! कौन सोच सकता है 6 बजे तड़के उठ कर और कुछ नहीं तो टहलने निकला जाए!! मगर मैंने खेल के जरिये इसे अपनाने का विचार बनाया। मुझे बैडमिंटन खेलने का शौक कॉलेज समय … Continue reading

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