Monthly Archives: April 2018

मेरे मित्र- शब्दअंश

अक्सरकोई सुनना नहीं चाहता कभी मुझे कभी सच्चाई को मेरे लिए वक्त की कमी है या सूख रही दिल की नमी है खैर, मैंने दर्द और सुकूं सब, लफ़्ज़ों में बांट लिया है हर्फ़ अल्फ़ाज़ों के रूप में ढलकर चले … Continue reading

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प्रकृति के पाठ..

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