इमली का पेड़

अजमेर की जिस सुनसान सड़क पर सीना तान कर अकेले खड़े इमली के पेड़ को देखकर डर जाया करता था, आज उसके चारों ओर कतार से बाजार सज चुके हैं।
पेड़ को इतना भी नहीं बख्शा कि धूप से परेशान राहजन या मवेशी उसकी छाया में सुकून पा सकें।
प्रकृति का सम्मान करने और उसकी महत्ता को समझने वाले कम ही होते हैं।
पिछले 40 वर्ष से उस सड़क पर मेरे बचपन का गवाह एक बस वही है !
इमली का वृक्ष साल भर हरा भरा रहने वाला वृक्ष है। इसका फल खट्टा मीठा होता है जिसे इमली के रूप में जाना जाता है। भारतीय रसोई में इमली को जगह मिली हुई है। कई व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के लिए इमली का उपयोग होता है। इसके बीज में औषधीय गुण होता है। हम तो इन बीजों को दो भागों में विभक्त करके चंगा पौ नामक क्रीड़ा में पासों के रूप में काम मे लेते थे। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है, अतः फर्नीचर के लिए काम मे आती है। अब तो फर्नीचर में भी बहुधा प्लास्टिक, या स्टेनलेस स्टील का उपयोग होने लगा है। लकड़ी उपलब्ध न हो पाने की वजह से भी नए प्रयोगों ने जन्म लिया होगा।
कहाँ से आये बहुतायत में इतनी लकड़ी !!
जैसे तैसे वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है तो लोग आसानी से बड़े हो जाने वाले वृक्ष लगाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं, ताकि उनमें बार बार पानी खाद देने और उनकी सार संभाल करने के झंझट से मुक्ति मिल जाये! अब आम, शहतूत, जामुन, इमली  के विशाल वृक्षों की आधारशिला कौन रखता है!

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इमली का पेड़

हाँ तो बात कर रहा था मैं अपने मौहल्ले की मेन सड़क पर लगे उस इमली के पेड़ की। अपने बड़ों को मैंने कहते सुना था कि इमली के पेड़ पर भूत रहते हैं। मेरे बाल अवचेतन पर स्वाभाविक था गहरा असर पड़ा। रात क्या दिन में भी मैं उसके पास से गुजरने में डरता था। तब उस रोड़ पर आबादी बहुत विरल थी। मुझे उधर से गुजरना हो तो मैं किसी साथ कि तलाश किया करता था। रात में तो मैं कल्पना भी नही कर पाता था कि इमली के उस कद्दावर और घने वृक्ष को देख भी सकूँ।
वृक्षों को बचाने के लिए ही “भूत” नामक डर को फैलाया जाता होगा ताकि लोग उसे नुकसान न पहुंचाएं। पीपल और वट वृक्ष के प्रति भी ऐसा ही भय व्याप्त रहता है । ये सभी वृक्ष मानव समाज और प्रकृति के लिए बहुत बड़ा योगदान हैं।
आज जब मैं अपने गृह नगर के मौहल्ले में पहुंचता हूँ तो उस वृक्ष को देखकर अतीत में खो जाता हूँ। वो बचपन का डर एक पल के लिए लौटकर आता है किंतु ज्ञान उसे पल भर में समाप्त भी कर देता है।
हमेशा की तरह मेरा पुनः सबसे अनुरोध रहेगा । वृक्ष मानव जीवन का बहुत बड़ा सहारा हैं। आज जो विशाल वृक्ष हम देखते हैं उसके लिए हमे अपने पूर्वजों के लिए कृतघ्न होना चाहिए।
लेकिन हम हमारे उत्तराधिकारियों को क्या देकर जा रहे हैं ?

 

 

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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