आशीर्वाद की अनुभूति~

(7 अप्रैल 2017)

बीती रात मुझे पूरे समय नींद नहीं आई। हाँ तड़के कोई 4 बजे बाद कोई आँख लगी होगी।
लेकिन आँख लगने के बाद जो मैंने स्वप्न में देखा तो अब तक पछता रहा हूँ कि मेरी आँख क्यों खुली ? मैं उस परमानंद के प्रसाद को और अधिक लेना चाह रहा था । कोई साढ़े 5 बजे आँख खुली और मैं उस आनंद-यात्रा से बाहर निकल आया था। उठते ही मैनें श्री गजानंद जी , हनुमान जी आदि देवताओं को अश्रुपूरित आंखों से नमन किया और देर तक पुलकित रहा और संभवतः पूरे दिन रहूंगा भी!
अभी रामनवमी गुजरी ही है और मैं अस्पताल में बीमार अवस्था में 4 दिन निराहार दवाइयों और ड्रिप पर काट कर कल ही आया हूँ अर्थात मेरे आधे नवरात्रे परमात्मा की कृपा से निराहार अवस्था में हो गए थे।
मेरे पिताजी ने भगवान् राम के भजन पूजन की एक संध्या या पूरी रात का आयोजन किया जिसमें मेरे परिवार के अनेकानेक बड़े पधारे थे। भगवान् राम लक्ष्मण सीता माँ हनुमान जी की बड़ी बड़ी तस्वीरें सजी हुई थीं।
एक महंत द्वारा केसर मिलाकर खूब भांग बांटी जा रही थी। सामने बैठे थे कमाल भाईसाब।, जो महंत के भांग बांटने के कार्क्रम में सहयोगी रूप में उपस्थित थे । बाउजी के पड़ौसी मित्र और अपने स्वजाति मित्र लाडली प्रसाद जी समेत कई पड़ौस के सज्जन पधारे थे।
एक बड़े भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें पूड़ी, आलू की सब्जी और हलवे का भोजन सैंकड़ों लोगों ने किया। मेरी भुआ, मम्मीजी, किरण समेत सभी बहनें और भुआ जी की समस्त पुत्रियों और जवाइयों समेत समस्त परिवार शामिल हुआ।
सबसे बड़ी बात बाऊजी ने हनुमान जी का रूप धारण किया और झांकी के रूप में भगवान् राम के समक्ष घोटा लेकर खड़े हुए थे।
मैंने उनकी कुछ तस्वीरें मोबाइल में लेने का प्रयास भी किया।
बाउजी को इस रूप में देखकर और समस्त परिवार को एक साथ काफी अंतराल बाद भोजन करते हुए देखकर मैं बहुत प्रसन्न था।
लेकिन सपना तो सपना ही होता है। टूटना था….टूट गया।
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। मैंने उठकर भगवान् की मूर्ति को हाथ जोड़े और इस अद्भुत दर्शन से रोमांचित करने के लिए आंसूओं के साथ धन्यवाद दिया।
प्रभु की, और मेरे घर के बड़े जनों की, माता पिता और सभी वृद्ध जनों की कृपा बनी रहे। कमल भाईसाब तो मेरे स्वप्न में अक्सर आते हैं लेकिन आज समूचा परिवार दर्शन दे गया।
मैं अभिभूत हूँ।
आप जो भी बड़े छोटे हैं अन्य परिजनों से मेरे इस स्वप्न को बाँटें और अर्थ निकालने का प्रयास करें, घर के बड़े जनों और ईश्वर ने क्या संदेश और क्या आदेश दिया था।

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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