नई मुसीबत

सावन की झड़ी हो जैसे कोई,
ज्ञान बरस रहा है हर और से
क्या करूँ किसको मानूँ
अचरज में हूँ दुनियाँ के शोर से !
भूले घूमना फिरना हम,
‘इवनिंग विजिट’ पर अब
कोई नहीं आता जाता है,
मोबाइल से बच गए तो शेष वक्त
‘कपिल शर्मा का शो ‘ ले जाता है ।
घर के जालों और जंजालों को भूल
दो हंसों का जोड़ा ,
पलंग के  दो कोने पकड़ कर पड़ा है ।
रात मेमोरी साफ किये थे
सुबह उठे तो पाते हैं,
और नई सलाह मशविरों से
मोबाइल अटा पड़ा है !!

😯

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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