बसंत पंचमी

screenshot_2017-02-01-11-59-41

सभी सनातन धर्मियों को बसंत पंचमी की शुभ कामनाएं..
माघ मास की पंचमी को आने वाला पर्व पीत रंग को समर्पित है।
खेतों में पीली सरसों, और खिलती हुई गेंहू- धान की बालियां, और ,आम के वृक्षों पर आती हुई बौराइयाँ..!
पीले वस्त्रों को धारण कर इस पर्व को मनाते हैं हिन्दू।
इस पर्व के अनेकानेक महत्त्व है।
आज माँ सरस्वती का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।
यह पर्व कलाकारों के लिए उतना ही ख़ासा है, जितना शस्त्र पूजन के लिए विजयदशमी..!
आज ही के दिन सनातनियों के आराध्य भगवान्  श्री राम गुजरात प्रांत के डांग जिले में माँ शबरी के आश्रम पहुंचे थे और उनके हाथों मीठे फल खाये थे। भक्ति की प्रतीक माँ शबरी के आश्रम में आज भी वह शिला है जहां प्रभु विराजमान हुए थे।
ऐतिहासिक महत्व भी है आज के दिवस का!
आज ही के दिन 16 बार पराजित कर गौरी को छोड़ देने वाले और सत्रहवीं बार हारने पर अफगानिस्तान साथ ले जाये गए पृथ्वीराज चौहान ने चंदबरदाई के द्वारा सुझाये तरीके से गौरी पर शब्द भेदी बाण छोड़ा और मार गिराया था और बाद में कटारी से भी स्वयं को भी समाप्त कर लिया था।
और क्या लिखूं आज के लिए..
महाकवि सूर्यकांत निराला आज ही के दिन जन्मे थे ।
और मेरी प्रेरणाशक्ति जन्मदात्री मेरी माँ ने भी आज ही के दिन जन्म लिया था । माँ तुझे नमन !

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
This entry was posted in Uncategorized. Bookmark the permalink.

2 Responses to बसंत पंचमी

  1. वसन्त पंचमी के स्मरण से ही मुझे पिलानी में शारदा पीठ – जहां इस दिन मां के मन्दिर की विशेष साजसज्जा होती थी; की याद हो आती है।

    • alokdilse says:

      सही कहा सर,
      पिलानी के बिट्स( birla institute of technology and science) परिसर में बना माँ सरस्वती का मंदिर अपनी भव्यता के लिए ख्यात है।
      यह बिरला ग्रुप की विशेषता है कि अपने आद्योगिक विस्तार के साथ साथ उन्होंने पूरे भारत भर में भव्य मंदिरों का भी निर्माण कराया है इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं।
      जयपुर, दिल्ली भोपाल, कलकत्ता , हैदराबाद मथुरा सहित कई शहरों में बिड़ला ग्रुप के मंदिर दर्शनीय स्थल हैं।
      हिन्दू संस्कृति और मंदिर परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए बिड़ला ग्रुप का आभार!

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s