साँसों में घुलता प्रदुषण

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कल टीवी देख रहा था। न्यूज़ आ रही थी। दिल्ली में लोगों को कचरा इत्यादि जलाने के लिए पाबन्द किया गया है। वायु प्रदूषण इतना कि तयशुदा मानकों को तोड़ता हुआ आंकड़ा भयावह स्थिति में है और दिल्ली को गैस चैम्बर में बदल दिया गया है। हो सकता है जल्दी ही सुनाई दे, गुलजार साहब के गीत बीड़ी जलाई ले, ओ रे पिया… सुरक्षा मानकों के चलते बैन कर दिया गया है।
यहाँ राजनीति करने की जरुरत नहीं किन्तु सरकारी और बहरहाल, गैर सरकारी, सरकारी, मानवीय लापरवाहियों और प्रकृति की घोर उपेक्षा , ने जिंदगी के आगे प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। कि सावधान हो जाइये ,’ आप मौत के दरवाजे तक चले आये हैं।
कारखाने तो ठीक पर स्कूल – कॉलेज की छुट्टियां , कई ऑफिस बंद…!
कौन जिम्मेदार है इन सबका!!
बचपन में घरों की छत पर रातों में लेट चाँद सितारे और गहराता हु खूबसूरत आसमान निहारा करते थे।
अब रातों में आसमान में तारों की बारात नजर नहीं आती। इतना प्रदूषित हो चले हैं हमारे शहर!
अँधा धुंध फैक्टरियों के बंटते परमिट और वृक्षों की कटाई, घरों ऑफिसों में AC का उपयोग और बदले में मिल रही है हवा में बढ़ती गर्मी और प्रदूषण। पर्यावरणविद और समाचार एजेंसियां अपना दर्द बांटती हैं, मगर उनकी आवाज कोई सुनने वाला नहीं।
…और आज हालात ये बन गए हैं कि ठण्ड के मारे गली के नुक्कड़ पर अलाव जलता है तो ‘इशू’ बन जाता है। हम इतने संवेदन शील स्तर पर पहुँच गए हैं सचमुच चौंका रहा है।
दिल्ली या फिर अन्य छोटे मोटे शहर ‘ गैस चैम्बर’ यूँ ही नहीं बन रहे!!
हमारी अक्षम्य लापरवाही समूचे जीव जगत पर भारी पड़ने लगी है। कुछ मानव सहयोग से बनी जहरीली हवाएं जो मौत का पैगाम बन रही हैं।
सल्फर ऑक्साइड -जो कि कोयले और तेल के जलने से उत्सर्जित होती है।
और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड प्राकृतिक गैस, जो कि कोयला या लकड़ी जैसे ईंधन के अधूरे जलने से उत्पन्न होती है। अँधा धुंध गाड़ियों जा उपयोग जहर उगल रहा है। आउट डेटेड गाड़ियां नष्ट नहीं की जातीं। गाड़ियों से होने वाला उत्सर्जन कार्बन मोनोऑक्साइड का एक प्रमुख स्रोत है।
कृषि प्रक्रिया से उत्सर्जित अमोनिया , कूड़े , सीवेज और औद्योगिक प्रक्रिया से उभरने वाली गंध भी हमारा वायुमंडल भयावह रूप से दूषित करती है।

सरकार हो, घर हों या फिर शिक्षण संस्थान, हमें सजग होना होगा। कुछ उपाय जो इस प्रदूषणीय मौत से बचाव दे सकते हैं वो इस प्रकार हो सकते हैं-
1- अधिकाधिक वृक्षों का लगाया जाना और उनकी कटाई रोकना। वृक्षारोपण की अनिवार्यता सभी के लिए हो।
2- सरकर द्वारा सभी को कुकिंग गैस उपलब्ध करवाना ताकि लकड़ी की कटाई रुके।
3- गाड़ियों के बजाय थोड़ी दूरी को पैदल, साइकिल रिक्शा, तांगे आदि के द्वारा पूरा किया जाये।
4- पेट्रोल डीजल का उपभोग अति सीमित हो।
कचरा जलाए बगैर उसका निस्तारण हो सके ऐसी विधियां ईजाद करना।
5- जागरूकता और सम्बंधित शिक्षा का प्रसारण सघनता और सजगता के साथ हो।
6-राष्ट्र प्रेम की भावना के साथ हम कार्य करें।

जागरूकता से ही जीवन संभव है अन्यथा मौत के तो कई बहाने हैं।

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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