मात्र भाषा नही, मातृ भाषा है हमारी हिंदी !!

sketch-1473829245928.jpgहिंदी दिवस(14 सितंबर) पर विशेष~
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भाषा को लेकर कल एक वाकया हुआ।

बेटा अंग्रेजी माध्यम की स्कूल में पढ़ता है। दिक्कत ये हो गई है कि वह ना गुरूवार में समझता है ना डेढ़ सौ/ ढाई सौ आदि हिंदी भाषी अंकों में समझता है।
(मैं समझता हूँ जिनके भी बच्चे अभी 4th स्टैण्डर्ड तक अंग्रेजी माध्यम की स्कूलों में पढ़ रहे हैं उनके सामने भी यह समस्या आई तो होगी)
कल घर की आटा चक्की में कुछ प्रॉब्लम आ गई।
गेहूं पिसने से रह गया।
उसकी मां ने तुरत फुरत में ‘आशीर्वाद’ का फ्लौर बैग बेटे से सोसाइटी की दुकान से मंगवाया और उसे 500 रूपये का नोट थमा दिया। बेटा आटे का bag ले आया और बोला , मम्मी ढाई सौ रूपये लिए हैं।
यह सुनते ही उसकी माँ आग बबूला हो उठी । मुझ तक बात आई तो दिमाग में झटका मुझे भी लगा कि 50 रुपये किलो का गेहूं का आटा हिंदुस्तान में कब से बिकने लगा !!😲
तुरंत मुझे दौड़वाया गया क़ि ये पाठक तो बच्चा समझ कर ठगने लगा । मैंने भी उसे सबक सिखाने की ठान ली।
मैं बेटे के साथ वो bag लेकर चल पड़ा।
फिर ख़याल आया कि नोट तो गिनूँ, !!
गिनने पर वो 350 रुपये निकले। मतलब bag 150 का हुआ।
मैंने कहा बेटे कृष्णा, ये तो डेढ़ सौ का हुआ।
उसने भोलेपन से कह दिया अंकल ने 150 rupees न कह कर डेढ़ सौ बोला तो मैं भूल गया और ढाई सौ याद रह गया।
बाद में उसकी माँ और मैंने अपनी ही गलती को स्वीकारते हुए ये तय किया कि वक्त तो जाने कब बोलचाल की हिंदी इसे सिखलायेगा हमें ही इसे घर पर हिंदी की व्यावहारिक शिक्षा का ज्ञान कराना पड़ेगा।
पढ़ाते हुए भी आदतन मैं पहाड़ा बोलते हुए …
तेरह छक्के अठहत्तर बोलता हूं तो बेटे के सर के ऊपर निकल जाता है फिर thirteen eight ja seventy eight बोलना ही पड़ता है।😊

हिंदी मात्र भाषा नहीं अपितु हमारी मातृ भाषा है।
इसके प्रति हमारी निष्ठा हमारी जिम्मेदारी बनती है।

अधिक से अधिक भाषायी ज्ञान आपकी विद्वता को दर्शाता है किंतु हिंदी का व्यावहारिक उपयोग आपकी राष्ट्रीय पहचान को आपके राष्ट्र प्रेम की व्याख्या करता है।
अंग्रेजी पर थोड़ी बहुत पकड़ होने के बावजूद मैं हिंदी लेखन में खुद को सहज मानता हूँ। रात में सपने भी हिंदी में आते हों तो उन्हें साकार करते वक्त हम क्यूँ हिंदी को पीछे कहीं रख दें।
गर्व से कहें हम हिन्दू हैं , हम सब हिंदी हैं।
🙏🏼😊

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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