खेल नहीं हैं ‘खेल’ !

*ओलम्पिक 2016….*

अमेरिका 100 पदक
चीन 59 पदक
ब्रिटिन 56 पदक
भारत 2 पदक

ओलम्पिक खेल अभी जारी हैं, और पदकों की सूची देखें तो कुछेक राष्ट्र  दौड़ में काफी आगे निकल गए हैं। ये वही राष्ट्र है जिन्हें विकसित कह जा सकता है।  हमारा राष्ट्र भारत भी विकसित रास्तों में शामिल होने के लिए प्रयासरत है। मंगलयान की सफल यात्रा , परमाणु क्षमता के साथ आत्मनिर्भरता  तथा  आईटी जैसे क्षेत्रों में विकास के साथ हम उन्नत हो काने का ख्वाब देख रहे हैं।किंतु उपरोक्त खेल सूची देखकर कुछ और ही सन्देश जाता है। कहा जा सकता है कि भारत खेल जगत में शैशव अवस्था में है।
क्या ये सच है? अगर हाँ तो क्रिकेट में हम कैसे दुनियाँ में धूम मचाते फिरते हैं? यह एक कडुवी सच्चाई है । क्रिकेट के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जाता है जबकि अन्य खेलों के लिए हमारे देश में जमीनी स्तर की आवश्यकताएं भी पूरी नहीं होती।
ना स्तरीय मैदान, न कोच, और न ही पर्याप्त फंड !
यहाँ से ओलम्पिक में पहुंचने वाले खिलाड़ी अपने जूनून और मित्रों, और खेल प्रेमियों की मदद से आगे बढ़ते हैं ।
और खिलाड़ी ओलम्पिक जैसी प्रतियोगिताए तक पहुँच कर आशानुरूप प्रदर्शन न कर पाए तो यह खिलाड़ी नहीं बल्कि देश के लिए गंभीरता से सोचने का विषय है।

इसके उलट चीन जैसे देश में छोटे चजोते बच्चों को बर्बरता के साथ ओलम्पिक के लिए तैयार किया जाता है। यूँ समझ लीजिए बच्चा जैसे माँ बाप का ना होकर राष्ट्र की संपत्ति हो जाता है। वह रोज घंटों कड़े प्रशिक्षण से होकर गुजरता है। बच्चों का बचपन ही छीन लिया जाता है। चीन जिसे राष्ट्र में जहां बर्बर पागलपन है वही  भारत में यह जूनून बस क्रिकेट तक सीमित है। अन्य खेलों के लिये हमारी सरकार का नजरिया सौतेली माँ जैसा होता है।
हम इस स्थिति से शायद परिचित भी हैं। और इसीलिए..अगरतला से हमारी बेटी दीपा करमाकर..
जिम्नास्ट में चौथे नंबर पर रह जाती है तब भी हमें गर्व का अनुभव होता है। क्योंकि वजह साफ़ है। दीपा ने हिंदुस्तान को जिस मुकाम तक पहुंचाया है वह चमत्कार जैसा है। हमें उम्मीद ही नही होती कि हम पदक के नजदीक पहुंच पाएंगे।
इस आधार पर साक्षी और सिंधु पदक लाती हैं तो यह सचमुच गढ़ जीतने जैसा है।
वैसे कहा जाना चाहिए कि हमारी खेल- जागरूकता बढी है और भविष्य में हम अंतरिक्ष विज्ञान के बाद खेलों की पदक तालिका में भी काफी ऊपर होंगे।

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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