अहसास ऐ ज़िन्दगी

छाँव में रख के ही पूजा करो मोम के बुत धूप में अच्छे भले नक़्श बिगड़ जाते हैं दायरों को बंधन समझकर रस्ते न बदल देना भटकते वहीँ हैं जो खुद से दूर निकल जाते हैं गैर भी बन जाते है कभी वजह जिंदगी की हट …

Source: अहसास ऐ ज़िन्दगी

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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