श्री रविशंकर जी का दिल्ली आयोजन- मेरे नजरिये से !!

srisri_event_बीती 11, 12, और 13 मार्च को दिल्ली की यमुना नदी के फैले हुए कछार (पाट) में बैंगलौर के आर्ट ऑफ़ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रवि शंकर द्वारा आयोजित सांस्कृतिक आयोजन समाप्त हुआ।
आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था सशुल्क सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन/ कार्य करती रही है।
सुदर्शन क्रिया नामक एक योग काफी प्रसिद्द योग है । जो आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था का आधार भी है। कहते हैं इससे इंसान मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक रूप से स्वस्थ होकर प्राकृतिक अवस्था को पा लेता है। श्री श्री रविशंकर सशुल्क यह विद्या सिखाते हैं।
चूंकि श्री श्री विश्व भर में अपने भ्रातृत्व और विश्व बंधुत्व की भावना और इस दिशा में कार्य करने के लिए जाने जाते है लिहाजा मैं भी उनका प्रशंसक हूँ। उन्होंने अमेरिका और ईराक में भी अशांति के दौर में एक बार वहां जाकर अपने कार्यक्रम दिए हैं सुदर्शन क्रिया सिखाई है जिससे कि उन देशों का जन समुदाय इस विद्या द्वारा लाभान्वित हो सके।

दिल्ली में ऐसा क्या हो गया कि इतने बड़े सांस्कृतिक आयोजन में आम जन ने उनके खिलाफ आवाज उठाई।
महामहिम राष्ट्रपति जी जो की उनके कार्यक्रम में आने वाले थे , किनारा कर लिया?
ऐसा क्या था कि उनके आयोजन पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया गया।
कुछ वीडियो क्लिपिंग के द्वारा यह जानकारी मिली है कि स्थान के समतलीकरण में उन्होंने यमुना जी का मलवा हटाने के बजाय नदी में ही डाल दिया। नदी का कछार मलवे से भरना और उसपर रोलर चलाना, शायद जुर्माने की वजह हैं दुःख इस बात का भी है की श्री श्री ने इसे नकारा है।
4-5 दिवस पूर्व उनका एक पत्रकार वार्ता को मैंने सुना देखा था।
मुझे एक बात पर बहुत आश्चर्य हुआ कि यमुना जी की सफाई का हवाला देते हुए श्री श्री ने एक फोटो दिखलाया जिसमे एक भैंस पानी में उतर रही है। श्री श्री का तर्क था कि यमुना का पानी उनके सफाई अभियान के द्वारा इतना साफ़ हुआ है कि उस पानी में भैंस भी जाने लगी हैं।
एक एंजाइम के द्वारा श्री श्री ने दिल्ली की यमुना जी को साफ करने की बात कही। आखिर ये एंजाइम क्या है किसी वैज्ञानिक संस्था द्वारा तकनीकी रूप से प्रमाणित है यह स्पस्ट नहीं किया गया। बस भैंस को पानी में उतारते हुए दिखला कर प्रमाणिकता सिध्द की गई। मुझे बहुत बुरा भी लगा।
अब ये भला कैसा तर्क हुआ!!
कोई संदेह नहीं कि कई देशों के प्रतिनिधि इस आयोजन की शोभा बने, और देश की सांस्कृतिक महता का एक बार और महिमामंडन हुआ।
लेकिन इसके पीछे उठे कई मुद्दों को दरकिनार तो किया है इसमें संशय नही। वरना राष्ट्रीय गर्व को बढ़ाने वाले कार्यक्रम में 5 करोड़ का जुर्माना क्यों ?
वो भी जब की मोदी और केजरीवाल दोनों श्री श्री के चहेते हैं।
इस आयोजन में एक बड़े मंच का निर्माण हुआ जो की 1200फीट लंबा, 200 फीट चौडा और 40 फीट ऊंचा है। प्रश्न है कि क्या यह मंच एक साथ मंच पर आने वाले कलाकारों की बताई संख्या को एक समय में वहन करने की क्षमता रखता था?
क्या किसी विभाग ने उसकी सुरक्षा को प्रामाणित किया था? शुक्र है ऊपर वाले का , कोई हादसा नहीं हुआ।
इसके आलावा दो पुल भी बनाये गए जो दिल्ली लोक निर्माण विभाग और एक पुल सेना द्वारा बने गया जिनकी लागत 4 करोड़ आई ।
इनमे लगे पैसे का हिसाब अभी तक समक्ष नहीं रखा जायेगा , या नहीं । भविष्य के गर्भ में है।
35 लाख लोगों का एक नदी के मुहाने पर जमा होना और इतनी बड़ी संख्या में लोगों के मल मूत्रादि विसर्जन की माकूल व्यवस्था भी एक बड़ा सवाल रही। क्या यमुना इससे अछूती रह पाई होगी ?
एक बात और जो मुझे अनुपयुक्त लगी , वह यह की श्री श्री ने यमुना नदी के किनारे आयोजन का विरोध करने वालों को ‘ आसुरी शक्तियां’ कह कर उद्बोधित किया। संविधान की धारा 51 ए (जी) कहती है कि वन, झील, नदी और वन्य जीव समेत प्राकृतिक पर्यावरण की संरक्षा और समृद्धि प्रत्येक भारतीय नागरिक का मूल कर्तव्य है, तो फिर यह यमुना खादर संरक्षण के लिए आवाज़ उठाना ’आसुरी शक्तियों’ का कार्य कैसे हुआ ? प्रश्न यह है कि क्या भारतीय संविधान ने आसुरी कार्यों को हम नागरिकों का मूल कर्तव्य बनाया है ?
आरोप तो श्री राम के समय में द्वापर युग में भी लगते रहे हैं। तब माँ सीता को भी अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ा।
सवाल ये है कि जब कार्यक्रम वृहत् स्तर के हों तो हर मुद्दे का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए। आप यदि किसी बड़े पद से महिमा मंडित है तो आपकी जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है।

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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