ओछी चादर..ज़िन्दगी

ज़िन्दगी !! कैसी चादर है ये! जैसे राशन की दूकान या लंगर में मिला कोई कपडा हो, ..तंग पड़ता है । इस ओर से कभी उस छोर से खींचम खांच.. लगता है मन औ जिस्म जैसे बेमियादी कोई जंग लड़ता है । 😞 💦…

Source: ओछी चादर..ज़िन्दगी

About alokdilse

भारतीय रेलवे में यात्री गाड़ियों के गार्ड के रूप में कार्यरत.. हर वर्ष नए वृक्ष लगाने का शौक.. जब मन् भावुक हो जाता है , लिखना आरम्भ कर देता हूँ। ईश्वरवादी, राष्ट्रवादी और परम्परावादी हूँ। जियो और जीने दो में यकीन है मेरा।
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