Monthly Archives: December 2015

घट के राम

पूरा आश्रम , ‘हरे राम हरे राम..’के संकीर्तन से गुंजायमान हो रहा था। गुरु भाई ही नहीं , लग रहा था जैसे पेड़ की शाखों पर बैठे पंछी भी अपनी कलरव में प्रभुनाद कर रहे थे। हवा में फैला हुआ … Continue reading

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धारणा और मूल्य

Source: धारणा और मूल्य

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धारणा और मूल्य

आज तीसरी बार यह ब्लॉग लिखने बैठा हूँ । दो बार तकनीकी कारणों से मेरा असंरक्षित किया हुआ लेखन कार्य मिट गया। प्रभु परीक्षा ले रहे हैं। वो कह रहे हैं जो कार्य विगत् 30 वर्षों में नहीं किया वो … Continue reading

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