Monthly Archives: May 2014

एक दुपहरी जीवन की …

एक दुपहरी जीवन की ….

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एक दुपहरी जीवन की …

अपने एक रिश्तेदार के शैक्षणिक कार्य से मुझे कोटा खुला विश्वविद्द्यालय जाना पड़ा। जब मैं वहां पहुंचा तो ‘लंच’ का समय चल रहा था। राजस्थान का कोटा शहर वर्ष-पर्यन्त पानी से लबालब रहने वाली चम्बल नदी के किनारे बसा हुआ … Continue reading

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एक दुपहरी जीवन की …

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शेरखान की सवारी

शेरखान की सवारी.

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शेरखान की सवारी

” वक्त ” …. बहुत ही दमखम और वज़नदार शब्द है यह। कभी इसके हाथों हमारा चीरहरण होता है तो कभी सीताहरण की तरह हम ही अपह्रत हो जाते हैं। शेष रह जाती हैं तो बस यादें। यादों के जखीरे … Continue reading

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