घट के राम

पूरा आश्रम , ‘हरे राम हरे राम..’के संकीर्तन से गुंजायमान हो रहा था।
गुरु भाई ही नहीं , लग रहा था जैसे पेड़ की शाखों पर बैठे पंछी भी अपनी कलरव में प्रभुनाद कर रहे थे। हवा में फैला हुआ ईश स्वर तन मन में संचारित होने लगा था।
श्री पुष्कर जी के सप्त -ऋषि घाट पर स्थित पावन आश्रम !!
आज गुरुपूर्णिमा थी और माँ-पिताजी मुझे अपने गुरु आश्रम में लाये थे ।
बंगाली बाबा नाम से पहचाने जाने वाले गुरुदेव श्री सीताराम ओंकार नाथ जी महाराज का आश्रम था वह। बाबा अक्सर कलकत्ता से पुष्कर जी आकर प्रवास करते थे।

धुंधली यादों के धरातल पर किसी ठोस वजह का तो भान नहीं , बस इतना भर याद कि पिताजी ने उन्हें  गुरु मान कर उनसे दीक्षा ली।
फिर पूरा परिवार उनका अनुगामी बना।
आज मुझे दीक्षा के लिए लाये थे पिताजी।New Doc 38_1_20151230220337689
बाबा एक कम्बल पर बैठे हुए थे। कृष काया, ठोडी पर लंबी सफ़ेद दाढ़ी, जटाओं सी केश राशि, तन पर एक रामनामीऔर कमर अंगरखी , झुकी हुई कृष काया और चेहरे पर गाम्भीर्य …
उनके चारों और बैठे अनुयायी सतत हरे राम हरे राम..नाम के प्रवाह  में लीन थे। आत्मविभोर कर देने वाला वातावरण था।
पिताजी ने पुष्कर जी के घाट पर पुनः एक बार स्नान किया। मुझे भी अपना हाथ पकड़ कर डुबकी लगवाई। और सफ़ेद धोती पहनाई ।
मैं नव पोशाक में खुद को बड़ा असहज महसूस कर रहा था। पूछने पर माँ ने बताया की दीक्षा कार्यक्रम है अतः धवल वस्त्र पहनाये हैं।
मुझे क्या पता था भविष्य के गर्भ में शुभ्र रंग मेरा इन्तजार कर रहा है।
घाट पर कोई मछलियों के लिए दाना बेच रहा था। माँ ने मेरे हाथों से मछलियों को दाना डलवाया। उस वक्त तो वह मेरे लिए एक कोहतूल भरा कार्य था। आज उसका मर्म समझ में आता है।
हमारे वैष्णव धर्म की व्याख्या बहुत ही विशाल है। चींटी से लेकर हाथी तक सभी को भोजन कराने को हम “धर्म” समझते आये हैं।
मैं अपनी माँ के भावों को अब समझने लगा हूँ कि क्यूँ वो, चींटी, चिड़ियाँ, गाय, श्वान, कपोत सभी को अन्न स्वरूप आहार देना मुझे समझाया करती थी।
आज मैं अपने बच्चों को इन सब बातों का मर्म समझा कर अपनी माँ की नीति को अगली पीढ़ी में पहुँचाना चाहता हूँ। हमारा धर्म इसी तरह फलित होता रहता है।
नहा धोकर मैं गुरु दीक्षा के लिए एक कुशा के आसन पर बैठने का निर्देश हुआ।
कुछ ही समय पश्चात गुरुदेव पधारे। उन्होंने मेरे सर पर अपना हाथ रखा और झुक कर मेरे कानों में,
एक मन्त्र का उच्चारण किया-
|| हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे,
हरे कृष्णा हरे कृष्णा , कृष्णा कृष्णा हरे हरे||

खड़ाऊ पहने उनके चरणों में मैंने सर झुकाया। मुझे
आशीर्वाद देकर वे  अगले दिक्षुक की तरफ बढ़ गए।
9-10 बरस की उम्र रही होगी मेरी। इन सब बातों का अर्थ समझ पाना मेरे बस में नहीं था। पिताजी ने सहमति दी है तो जरूरी ही होगा। बस यही समझ कर अपने कर्म को अपनी जिम्मेदारी समझ लिया करता था।
गुरुदेव की वजह से मेरा घर राममय रहता था। पिताजी माँ एवं बहनें नित्य ही राम का नाम पुस्तिका में लिखते रहते थे। 12-13 वर्ष की वय तक आते आते मैंने भी यह लेखन आरम्भ कर दिया।
हर वर्ष गुरुपूर्णिमा को हम अपनी लिखी हुई राम नाम की पुस्तिकाएं गुरु आश्रम में ले जाकर गुरुदेव को भेंट करते। इसे ही वह गुरु दक्षिणा कहते थे।
आश्रम का मुख्य कक्ष ऐसी पुस्तिकाओं से अट जाया करता था।
मैं नहीं समझता कितना पाप / पूण्य का लेखा हुआ होगा , लेकिन राम नाम में मेरी श्रद्धा बहुत गहरी हो गई।
नवरात्रि के शक्ति पूजन के दिनों में भी मेरे घर में श्री राम जी की ही पूजा होती थी।
घर का नाम तक ‘श्री राम कुञ्ज ‘ रखा गया था।
आज ऐसे नाम नहीं मिलते अब ‘विला’ हो गए हैं।
मातृ या पितृ छाया भी हैं कहीं कहीं, लेकिन हकीकत कुछ और।
…आज उस आश्रम का नक्शा बदल गया है।
गुरुदेव के देवलोकगमन के पश्चात वहां काफी समय तक उनके शिष्य राम जप किया करते थे । फिर एक समय ऐसा भी आया जब आश्रम में जाने वाले भक्तों की संख्या में कमी होती गई।
और राम नाम का संकीर्तन फिर ऑडियो सिस्टम के द्वारा जारी रखा गया।
पिछले दिनों मैं हर बार की तरह हीअपने आश्रम में गया।
हर वक्त खुला रहने वाला आश्रम का मुख्य द्वार आज बंद था। उसे धकेल कर अंदर गया तो सन्नाटा फैला पड़ा था। बंदरों की एक टोली जरूर पेड़ों पर धींगा मस्ती कर रही थी।
उनका वो सन्नाटा तोडना मुझे अच्छा लग रहा था।
मालूम हुआ , वहा एक रखवाला रखा गया जो शायद भोजन व्यवस्था के प्रयोजन से कही इधर उधर था।
आँखें बंदरों की उछल कूद पर थीं मेरी, किन्तु कान उस निरंतर उठती हुई ध्वनि को तलाश रहे थे जब अब रुक गयी थी। वो राम जप का ऑडियो सिस्टम अब स्थिर हो चला था ।
मैं जैसे किसी अदृश्य सशक्ति के द्वारा निर्देशित हो रहा था। मानो बाबा कह रहे हों….
“आलोक , यहाँ भले यह संकीर्तन रुक गया , किन्तु अपने ह्रदय में तुम राम नाम का जाप यूँ ही सतत् बनाये रखना। यूँ ही..जब तक सांस थक न जाए जब तक…..!!”

 

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आत्ममुग्धता का नया रूप- ‘सेल्फी’

उस दिन मैं अपनी काम वाली बाई की बात सुनकर सकपका उठा। सुस्ताते हुए दिमाग में कई बिजलियाँ कौंधने लगी।
सुबह सुबह बैडमिंटन खेल कर आया था और अपनी थकान के कारण सोफे में धंसा हुआ था , यकायक काम वाली बाई जी का सवाल..” बाउजी सेल्फी वाला मोबाइल कित्ते में आ जाता होगा ?”
कैमरे की डिमांड अब सेल्फी मोड पर पहुंच गई ! ज़माना बदल रहा है ।
मोबाइल भी अब चारण भाट बन गए हैं।
‘क्लिक क्लिक’ की आवाजों और चमकती हुई फ़्लैश की रोशनी के साथ मोबाइल अब अपने मालिक की जी हजूरी में लगे रहते हैं। एक बार तो विचार आया किशायद सेल्फिश शब्द से ही सेल्फी बना होगा।
एक के बाद एक , कई फोटो रिजेक्ट करवाने के बाद मोबाइल एक फोटो के रूप में वो परिणाम सामने रख ही देता है जिसे हमारी आंखें स्वीकार सके। चेहरे को जाने कितने एंगल से मोड़ना पड़ता है तब जाकर एक सलोनी सी सेल्फी आकार लेती है।
मैंने बाईजी से पूछा, “क्या करोगी सेल्फी फोन का?”
बिना लाग लपेट के वो तपाक से बोली, आप भी साब मजाक करते हो!
सेल्फी से हम अपनी फोटो लेते हैं ना !
मैने कहा, तुम्हारी फोटो तो आपके घर में कोई और भी ले सकता है!
बाईजी बोली, साब , जब इच्छा हो तब खुद के हाथ से फोटो लेने का ही तो मजा है!
हे भगवान! ज़माने से आखिर तू चाहता क्या है?
एक तरफ वक्त की घड़ी के कांटे चैन नहीं ले रहे, घोड़े की तरह सरपट भागते रहते हैं, दूसरी तरफ जवानी बाय बाय करने में लगी रहती है।चाहे पतंजलि की या फिर किसी नामी कंपनी की क्रीम लाओ, बिन बुलाए झुर्रियाँ मेहमान की तरह तैयार हैं।
कोई चक्क नींद से, मन मारकर और उठकर सुबह वाक पर जा रहा है तो कोई जिम…तो कोई पेट को भूखा रख कर कैसे भी अपने युवा अंदाज़ को पकड़े रखना चाहता है मगर बैरी ये बांकपन रोके नहीं रुकता। लेकिन खूब बनाया भगवान तूने ये सेल्फी, ज़माना भी वक्त को टक्कर दे रहा है। उम्रदराज भी खुद को पकी उम्र का मानने को तैयार नहीं है।
कभी कभी अच्छा भी लगता है। चाहे फरेब ही सही, खुद को सदाबहार सुंदर मानकर चलने का भ्रम हमें थोड़ी सी खुशी दे देता है ! यहां तो हंसने के भी लाले हैं। उसके लिए भी 2-4 किलोमीटर चल कर किसी लाफ्टर क्लब का सहारा लेना पड़ता है।
मैंने बाईजी से पूछा, तुम्हें सेल्फी के बारे में किसने बताया? वो बोली, पूरी सोसाइटी में यहां वहां सेल्फी लेती लड़कियां , औरतें और आदमी दिखलाई दे जाते हैं।
कुछ तो होगा न साब इसमे।
समझ नहीं आ रहा था , गरीबी और वक्त की मार झेल रहा उसका चेहरा जरूर श्याह पड़ गया था मगर दिल कचनार था। उसे मैं निराश नहीं करना चाहता था। सबको जीने का हक है। मेरे अंदर का मानव उसे निरुत्साह करने से रोक रहा था। सोचा गलतफहमी सही मगर छोटी छोटी खुशियां जिंदगी को बांधे रखती है। बड़ी खुशी कभी नहीं आती। मैंने कहा, क्या करोगी सेल्फी का!
दो चार पल रुकी फिर हंसते हुए कहने लगी, बस खुद ही देख लेंगे।
भले शिक्षित न हो, गरीबी हो, लेकिन ख्वाब सबके सुनहरे होते हैं। जब सब ओर हवा बदल गई हो तो कौन अछूता रहे! मेरे को बार बार विचारों में खोते देख उसने सोचा , गलत आदमी से सवाल कर लिया।
मैं कुछ बोलता, इससे पहले उसने रुख बदलते कहा, ठीक है हम मैम साब से पूछ लेंगे। उसकी उत्सुकता बता रही थी , वो सेल्फी लिए ही मानेगी।
अरमानों को पूरा कर लेना ही जिंदगी है या बढ़ती इच्छाओं को नियंत्रित करना जीवन की कला है !
अनियमित इच्छाओं और लिप्साओं के पीछे दौड लगाते लगाते जीवन पूरा हो जाता है।
कभी कभी हम अपनी राह से भटक भी जाते हैं।
कोई रोड दुर्घटना में सड़क पर कराह रहा है या बहते हुए तेज पानी में किनारे तक आने के लिए छटपटा रहा है और लोग उसका वीडियो बनाने में व्यस्त थे, ऐसे भी भयावह किस्से सुनने को मिलते हैं। सेल्फी ने कइयों को ऊंची इमारतों, पहाड़ियों, और गाड़ियों से गिरा कर जिंदगी छीन ली लेकिन…क्या फर्क पड़ता है। नशा तो नशा होता है।
सेल्फी ने दिमाग को इतना जड़ बना दिया कि एक बार तो एक मोहतरमा अस्पताल में तीमारदारी करने पहुँची और दर्द में कराहते मरीज के साथ मुस्कुराते हुए सेल्फी ले डाली। क्या करे सेल्फी का धर्म सिर्फ मुस्कुराना है जिसने मानव धर्म को परास्त कर दिया है।

पीछे शांत कमरे से यकायक क्लिक की आवाज आई, देखा तो धर्मपत्नी जी ने अभी अभी सेल्फी ली थी अपनी।
मैंने कोई प्रतिक्रिया न करते हुए और ज्यादा कुछ सोचना छोड़ अखबार उठा लिया।

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आखिर जीना तो है..

सुनो दोस्तों,

खुशियां होती नहीं !
तलाशी जाती है
अवसरों के शक्ल में
तराशी जाती है
कितना सकारात्मक
हो चला इंसां
खुद को मौके सुझाता है

ज़िन्दगी का एक वर्ष
हाथ से निकल जाता है
और
जनम दिन के नाम पर
मोमबत्तियां बुझाता है
🎂
हर पैर में कोई
कील चुभी होती है
होंट हँसते हैं मगर
आत्मा रोती है😣

हंसना अब शगल नहीं

यूं लगता है, मजबूरी है

इसीलिये लाफ्टर क्लब

बनाये जाते हैं

गमों की पहरेदारी में

हम जबरन हंसाएं जाते हैं
कभी पुराने एलबम
उठाकर देख लो
खुद को  पहचान न पाओगे

ज्यादा न सोचियेगा

बीपी, शुगर, हाार्ट ट्रबल

मुंह बाए खड़े हैं
कुछ ही सुलझे हैं
ज्यादातर मुद्दे
उलझे पड़े हैं
हां, तो कह रहा था
खुशियां होती नहीं
मनाई जाती हैं
कभी शोर के साथ
तो कभी गुमसुम
फीकी सी मुस्कान लिए
कैसे भी हो,
जीना तो है !
??
#आंकलन

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हे वनिते !!

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कोरा कागज़ है धवल वस्त्र है

र अवचेतन मन सीधा और पवित्र है

है नारी , इतिहास गवाह है
हर तीसरा द्वंद
तेरी खातिर होता है
तुम्हेें न समझने वाला
यश वैभव सब खोता है

एक विनती है मेरी –

 

कुदरत ने तुम्हें सहेजकर
बनाया है
अतिगुण संपन्ना कहकर
शास्त्रों ने श्रेष्ठ बताया है
इतना सब कुछ होने पर
अति श्रंगार किसलिए है
ध्यान भंग हो हमारा,
क्या ये वार इसलिए है ?

हे अंजना, हे व्यंजना-
रंभा उर्वशी और बनके मेनका
मत बेदो विश्वामित्रों को
विनती हमारी जिंदा करदो
पुनः अहिल्या और सावित्री को

तुम श्रेष्ठा , हो शक्तिदायिनी
कुल का मूल हो तुम
तुम मां हो तुम भगिनी
माँ यशोदा हो तुम

तुममे अरुंधति है
तुम सावित्री तुम जग धरणी,
तुममे ही सती है
तुम्हीं कौशल्या तुममें कैकयी है
तुममे मंथरा तुममे शबरी है

भवसागर की धार हो तुम
गृहस्थ का आधार भी तुम
मां बेटे की रार बने और,
भाईयों में तकरार भी तुम
तुम साथ दो तो
हर जटिलता का हल है
तुम जो अनदेखी करदो,
फिर अमृत भी गरल है
अपनी शक्ति पहचानो माँ
अपनी अहमियत जानो हे माँ
राम औ रावण सब तेरी कोख से

नारी पहली पाठशाला है
हे नारी तुझीसे उदर को निवाला है

 

हे कामिनी हे रमणी
सृष्टि रचना में
अग्रणी हे सुंदरी
स्वयं शंभू भी अपूर्ण हैं
तेरे बगैर
जगत कहाँ सम्पूर्ण है
हे वनिते
तुम पूज्या थी,
हो
और रहोगी भी
हे कांते
नमन् तुम्हेें !!

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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इजराइल और भारत

मैं इजराइल का व्यक्तिगत रूप से आरंभ से ही समर्थक रहा हूँ।
मेरा मानना है कि विशेषताओं को सम्मान और समर्थन दोनों ही दिए जाने चाहिए।
इस लिहाज से इजराइल नज़रे इनायत का हकदार है।
इजराइल के नागरिकों में राष्ट्रीयता कूट कूट कर भरी होती है और उसे इस मामले में जापान के समकक्ष रखा जा सकता है।
इजराइल का हर नागरिक परोक्ष रूप से सैनिक है।
क्षेत्रफल से तुलना करें तो इजराइल राजस्थान से भी छोटा है और पानी की भारी कमी वाला देश है।
फिर भी कृषि के क्षेत्र में इजराइल अपनी आवश्यकताओं का 85% अन्न स्वयं उत्पादित करता है।
वहां कृषि को पानी ,फैला कर नहीं अपितु उसी तरह दिया जाता है जैसे किसी व्यक्ति को ड्रिप चढ़ाई जाती हो।
पानी की एक बूंद खराब नहीं कि जाती। इसके अतिरिक्त इजराइल अपने waste water का 70 प्रतिशत पुनः कृषि योग्य बना लेता है।
हथियार तकनीक में इजराइल का कोई सानी नहीं।
भारत अपनी कुल आयातित अस्त्र शस्त्र का 7% प्रतिशत इजराइल से ही खरीदता है।
कोरिया जो कि ISIS जैसे आतंकवाद से जूझ रहा है, इजराइल से सटा हुआ है किंतु मजाल कि ISIS इजराइल की तरफ आंख उठाकर भी देख ले।
कल्पना करें यदि सीरिया भारत से सटा देश होता।

70 साल बाद मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जो इजराइल जा रहे हैं।
आखिर इतने उन्नत और सामरिक दृष्टि से मजबूत राष्ट्र की भारत की पूर्व सरकारों ने उपेक्षा क्यूँ की!!
शायद इजराइल के शत्रु राष्ट्र फिलिस्तीन से पंगा नहीं चाहा हो पूर्व प्रधानमंत्रियों ने!!
कहीं ये मुस्लिम जगत का तुष्टिकरण तो नहीं!!
मोदी जी इजराइल जाएंगे किन्तु फिलिस्तीन नहीं।
नीतियां स्पष्ट हों तो राष्ट्र आगे बढ़कर हाथ मिलाते हैं।
जब चीन आंख दिखा रहा है तो भारत के साथ अमेरिका, इजराइल ,जापान खड़े हैं। कल ही फ्रांस ने भी कहा है कि वह इस मामले।में भारत के साथ खड़ा है।
ड्रेगन को आंख दिखाने के बदले विश्व को अपने समर्थन में खड़ा करने की नीयत से मोदीजी ने विश्व भ्रमण किया है!!
अमेरिका सहित अन्य देशों की हाल ही की यात्राओं में मोदी जी ने जितनी भी रातों की नींद थी, वो यात्रा के दौरान अर्थात हवाईजहाज में ही पूरी की है, लेकिन इस बात को मीडिया जगत में जगह नहीं मिलेगी।
इजराइल भारत का बर्षों पुराना हितैषी रहा है।
इजराइल के पासपोर्ट पर एक सूचना स्पष्ट लिखी होती है।
*पाकिस्तान को छोड़ समस्त विश्व के लिए मान्य*
बता दूं ,पाकिस्तान जब से अस्तित्व में आया है तब से इजराइल , पाक विरोधी रहा है।
अगर चीन भारत से युद्ध करता भी है तो इजराइल भारत का सक्रिय रूप से सहयोग करेगा इसमे अतिशयोक्ति नहीं।
और अंत मे इतना और बताता चलूं , इजराइल भारत के साथ रिश्ते रखकर विश्व में अपनी जगह उच्च राष्ट्रों के बीच रखना चाहता है, क्यूंकि इजराइल जानता है आज भारत की स्थिति विश्व मे विश्वसनीय है।
फिर वो चाहे शांति स्थापना हो या फिर अंतरिक्ष तकनीक !!

#जय भारत
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इमली का पेड़

अजमेर की जिस सुनसान सड़क पर सीना तान कर अकेले खड़े इमली के पेड़ को देखकर डर जाया करता था, आज उसके चारों ओर कतार से बाजार सज चुके हैं।
पेड़ को इतना भी नहीं बख्शा कि धूप से परेशान राहजन या मवेशी उसकी छाया में सुकून पा सकें।
प्रकृति का सम्मान करने और उसकी महत्ता को समझने वाले कम ही होते हैं।
पिछले 40 वर्ष से उस सड़क पर मेरे बचपन का गवाह एक बस वही है !
इमली का वृक्ष साल भर हरा भरा रहने वाला वृक्ष है। इसका फल खट्टा मीठा होता है जिसे इमली के रूप में जाना जाता है। भारतीय रसोई में इमली को जगह मिली हुई है। कई व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के लिए इमली का उपयोग होता है। इसके बीज में औषधीय गुण होता है। हम तो इन बीजों को दो भागों में विभक्त करके चंगा पौ नामक क्रीड़ा में पासों के रूप में काम मे लेते थे। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है, अतः फर्नीचर के लिए काम मे आती है। अब तो फर्नीचर में भी बहुधा प्लास्टिक, या स्टेनलेस स्टील का उपयोग होने लगा है। लकड़ी उपलब्ध न हो पाने की वजह से भी नए प्रयोगों ने जन्म लिया होगा।
कहाँ से आये बहुतायत में इतनी लकड़ी !!
जैसे तैसे वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है तो लोग आसानी से बड़े हो जाने वाले वृक्ष लगाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं, ताकि उनमें बार बार पानी खाद देने और उनकी सार संभाल करने के झंझट से मुक्ति मिल जाये! अब आम, शहतूत, जामुन, इमली  के विशाल वृक्षों की आधारशिला कौन रखता है!

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इमली का पेड़

हाँ तो बात कर रहा था मैं अपने मौहल्ले की मेन सड़क पर लगे उस इमली के पेड़ की। अपने बड़ों को मैंने कहते सुना था कि इमली के पेड़ पर भूत रहते हैं। मेरे बाल अवचेतन पर स्वाभाविक था गहरा असर पड़ा। रात क्या दिन में भी मैं उसके पास से गुजरने में डरता था। तब उस रोड़ पर आबादी बहुत विरल थी। मुझे उधर से गुजरना हो तो मैं किसी साथ कि तलाश किया करता था। रात में तो मैं कल्पना भी नही कर पाता था कि इमली के उस कद्दावर और घने वृक्ष को देख भी सकूँ।
वृक्षों को बचाने के लिए ही “भूत” नामक डर को फैलाया जाता होगा ताकि लोग उसे नुकसान न पहुंचाएं। पीपल और वट वृक्ष के प्रति भी ऐसा ही भय व्याप्त रहता है । ये सभी वृक्ष मानव समाज और प्रकृति के लिए बहुत बड़ा योगदान हैं।
आज जब मैं अपने गृह नगर के मौहल्ले में पहुंचता हूँ तो उस वृक्ष को देखकर अतीत में खो जाता हूँ। वो बचपन का डर एक पल के लिए लौटकर आता है किंतु ज्ञान उसे पल भर में समाप्त भी कर देता है।
हमेशा की तरह मेरा पुनः सबसे अनुरोध रहेगा । वृक्ष मानव जीवन का बहुत बड़ा सहारा हैं। आज जो विशाल वृक्ष हम देखते हैं उसके लिए हमे अपने पूर्वजों के लिए कृतघ्न होना चाहिए।
लेकिन हम हमारे उत्तराधिकारियों को क्या देकर जा रहे हैं ?

 

 

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शंटिंग के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां

जैसे जिस्म की धमनियों में 24 घंटे रक्त प्रवाहित रहता है उसी तरह दिन रात हर घड़ी हजारों हजार गाड़ियां दौड़ती रहती हैं।
इन गाड़ियों के आरंभिक स्थल से लेकर मार्ग में वाणिज्यिक और यांत्रिक कारणों और गंतव्य स्थल पर भी शंटिंग कार्य की आवश्यकता होती है।
शंटिंग आपरेशन एक ऐसी सामूहिक प्रक्रिया है जिसमे दो या दो से अधिक कर्मचारियों के आपसी तालमेल की जरूरत पड़ती है। इस प्रकार यह एक जरूरी उद्यम हो जाता है हमे कुछ सावधानियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1) शंटिंग की गति के लिए जो नियम बनाया गया है उसके अनुरूप किसी भी दशा में गति 15 kmph से अधिक नहीं होनी चाहिए।
2)जिस स्टेशन पर शंटिंग की जानी है उसके SWR से हम भली भांति अवगत हैं यह भी सुनिश्चित हो।
3)जो भी शंटिंग कार्य है उसको भली भांति समझकर हमने आवश्यक प्राधिकार प्राप्त कर लिए हैं।
4) एक कोच/ वैगन के मामले में जिस रोलिंग स्टॉक को काटा जाना है वह सही है जैसे कि कोई पार्टी कोच गाड़ी से अलग करना है तो हमने कोई दूसरा कोच न काट दिया हो।
5) शंटिंग में प्रयुक्त हाथ संकेतों में दिन में लाल- हरी झंडियां और रात्रि में लाल- हरी led युक्त बत्ती का प्रयोग हो । लाल आस्पेक्ट खराब हो जाने पर सफेद बत्ती का नियमानुसार उपयोग हो अन्यथा सफेद बत्ती शंटिंग कार्यों में वर्जित है।
6) जिन रोलिंग स्टॉक मे मानव हों अर्थात आर्मी गाड़ी के डिब्बे, श्रमिकों से भरे डिब्बे, या यात्री गाड़ी के डिब्बे 8 kmph से अधिक गति में शंटिंग न किये जाएं।
7)शंटिंग के लिहाज से अलग अलग रोलिंग स्टॉक की अलग अलग गति सीमा है उनका पालन हो।
8) यात्री गाड़ी की शंटिंग है तो ध्यान रहे इंजन कटने के बाद शेष बचे भाग के आखिरी कोच का कॉक खोल दिया गया है ताकि उसका प्रेशर ड्राप हो जाये और गाड़ी लुढकने का डर न रहे। और इंजन काटने से पहले ब्रेकवान का हैंड ब्रेक वान्ध दिया गया है यह सुनिश्चित किया जाए।
9) शंटिंग के लिए जो अधिकृत व्यक्ति है वो ही शंटिंग करे, ऐसा न हो गार्ड साब ड्राइवर साब को चाय पीने ले जाये, और शंटिंग सहायक ड्राइवर करे। ध्यान रखें गार्ड बंधुओं आपकी चाय की मिठास कहीं कडुवाहट में न बदल जयें।
10) शंटिंग सही स्थान से करवाई जाए। लीवरमेन फ्रेम से ही संकेत दे रहा है कहीं ऐसा न हो पास वाली लाइन का चालक जिसे घर पहुँचने की जल्दी है, वो रवाना हो जाये।
11) शंटिंग के दौरान मार्शलिंग का भी पूरा घ्यान रखा जाए अन्यथा संचालन के दौरान हुई गड़बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
12)दोस्तों, शॉर्टकट न अपनाएं। बहुत पहले जब मैं मालगाड़ी गार्ड था, एक बार यार्ड में दुर्घटना होते होते बची।
गाड़ी को जल्दी चलाने का दबाव था वैक्यूम गाड़ी के हौज़ पाइप को रखने के लिए वैगन में डमी प्लग नही था । समय बहुत लग रहा था, इतने में यार्ड मास्टर आये और उन्होंने हौज़ पाइप को अपनी हथेली से बंद कर निर्धारित वैक्यूम बना दिया । अब ट्रेक में वो आगे और पीछे शंटिंग का वैगन और इंजन! इतने में जोर का झटका आया और मैंने बिना कोई पल गंवाए उन्हें तुरंत बाहर खींच लिया। आप समझ सकते हैं कैसा हादसा हो सकता था।
साथियों, मेरे एक मित्र अक्सर कहते थे ” खड़ी का जवाब है पड़ी का नहीं ”

समय कितना लगे ये बाद कि बात है लेकिन संरक्षा की अनुपालना हमारा परम ध्येय हैं हम इससे चूकें नही।
धन्यवाद साथियों!!

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गुलाब जिंदगी ?

हर पल खुशियां
नृत्य, रास
हंसी के छल्ले
खिलते चेहरे..
जिंदगी यहीं तक नहीं !

गुलाब जिंदगी
काँटों का अहसास
तीखी तो कभी
मीठी वेदना
अव्यक्त भय
पलटते मोहरे
और
बदलते चेहरे
यही है..जिंदगी !!
🌿

#अलफ़ाज़_मेरे

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